February 2, 2026

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शुक्लावास समेत 5 गाँवों में एनजीटी के निर्देशानुसार सर्वे का मामला जिला कलेक्टर से मिले आमजन व खनन मजदुर।

कोटपूतली (बिल्लुराम सैनी)
निकटवर्ती ग्राम शुक्लावास, पवाना अहीर, पिचाणी, दुदावास व बुचारा में हुए अवैध खनन व अवैध हैवी ब्लास्टिंग में 505 परिवारों को हुए आर्थिक नुकसान का सर्वे किये जाने को लेकर एनजीटी न्यायालय भोपाल के आदेशानुसार जिला कलेक्टर के निर्देश पर गठित की गई विभिन्न विभागों की कमेटी पर हाल ही में खनन ग्रस्त संघर्ष समिति द्वारा सर्वे में लगाये गये गलत रिपोर्ट बनाकर लिपापोती करने के आरोपों का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को एडीएम जगदीश आर्य की अगुवाई में शुक्लावास पहुँची विभिन्न विभागों की कमेटी ने सर्वे कार्य शुरू किया था। जिसकी जाँच रिपोर्ट पर सवालिया निशान खड़े करते हुए खनन ग्रस्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने मंगलवार को जिला कलेक्टर राजन विशाल के समक्ष पेश होते हुए सर्वे रिपोर्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाये थे। वहीं दूसरी ओर प्रकरण में आमजन व खनन मजदूरों के एक दल ने गुरूवार को जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत होकर जाँच कमेटी की रिपोर्ट पर लगाये जा रहे लिपापोती व गड़बड़ी के आरोप को बेबुनियाद बताया। इस बाबत जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि वर्तमान जाँच कमेटी द्वारा निष्पक्ष जाँच करते हुए सर्वे किया जा रहा है। इसके उपरान्त भी परिवादी समिति द्वारा बाधा डालते हुए सर्वे कमेटी को गुमराह कर प्रत्येक परिवार को 5-5 लाख रूपयों का मुआवजा दिलवाने का दबाव बनाया जा रहा है।

जबकि अधिकतर कच्चे व पक्के मकान सरकारी जमीन में बने हुए है जो कि गैर कानूनी व अवैध कब्जाधारी है। जिन्हें किसी भी प्रकार का मुआवजा दिया जाना भी अनुचित है। मकानों में जो दरारें आई है वह प्राकृतिक कारणों एवं निर्माण की कमी से आई है। जिनका खनन कार्यो से कोई लेना देना नहीं है। कई कमेटी सदस्यों के मकान खनन क्षेत्र से एक से डेढ़ किमी दुरी पर स्थित है। कोरोना काल के बाद कार्य शुरू होने से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधरी थी लेकिन पुन: कार्य शुरू हो जाने से अधिकांश महिलायें व ग्रामीण पुन: बेरोजगार हो चुके है। जिनके रोजी रोटी के रास्ते बंद है। ज्ञापन में यह भी बताया कि कुछ लोगों द्वारा ग्रामीणों को भ्रमित कर व झुठे सपने दिखाकर खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाते हुए खनन संचालकों के विरूद्ध झुठी शिकायतें दर्ज कर पैसा कमाने का जरिया बना रखा है। खनन कार्य बंद होने से सरकार को राजस्व की भी हानि हो रही है। खनन संचालकों ने यह भी बताया कि जिस समय खान आंवटित की गई थी वे आबादी से दुरी पर स्थित थी। जिनकी जाँच समय-समय पर होती है। साथ ही खनन संचालकों ने विभिन्न आवश्यक अनुमति लेकर सुरक्षात्मक तरीके से खनन कार्य किया है। जिससे उधोग-धंधे के साथ-साथ ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। ज्ञापन में यह भी बताया कि विभिन्न खानों के माध्यम से शुक्लावास व आसपास के गांवों में राजकीय विधालयों में वृक्षारोपण, पेयजल व चिकित्सा व्यवस्था एवं धार्मिक तथा सामाजिक कार्यो में सहयोग किया जाता है। ऐसे में उक्त बंद पड़ी खानों को पुन: शुरू करवाकर ग्रामीणों को बेरोजगार होने से बचाया जायें।